Sunday, 13 November 2016

नॉस्त्रादेमस की भविष्यवाणियाँ : द्वितीय विश्वयुद्ध (पुर्वार्ध)

(एडॉल्फ हिटलर)
(Source : Internet)

                १ सितंबर १९३९ के दिन जर्मनीने पोलंड पर आक्रमण करके द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरवात की। द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू करने का पुरा श्रेय तत्कालीन जर्मन चेन्सलर एडॉल्फ हिटलर को जाता है। प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार हुई थी और अपमानजनक समझौता मंजूर करना पडा था, उसका पुरा बदला लेने की हिटलर ने ठाण ली थी। 'व्हर्साय समझौता' से जर्मनी का जितना नुकसान हुआ, उससे जर्मनी को उभरने के लिए हिटलर ने बहुत प्रयास किया। इससे वह जर्मन समाज का 'हिरो' बन गया। पोलंड पर आक्रमण करने से पहले हिटलर ने फ्रान्स से जर्मनी का छिना हुआ प्रांत वापस लिया। उसके बाद ऑस्ट्रिया और झेकोस्लोव्हाकिया इन राष्ट्रोंपर जर्मनी का स्वामित्व प्रस्थापित किया। यह सब उसने खून का एक बुँद भी ना गवाकर सिर्फ दबावतंत्र का इस्तेमाल करके हासिल किया। किंतु पोलंड पर आक्रमण करके उसने ब्रिटन और फ्रान्स जैसे दोस्तराष्ट्रोंके हितसंबंध को हानी पहुचाई, और यही द्वितीय विश्वयुद्ध का कारण बना।
                नॉस्त्रादेमस कि अनेक चतुष्पदी में हिटलर का उल्लेख स्पष्टरुप से मिलता है। कई बार 'हिस्टर' एवं 'हिलटर' इतनेही बदलाव से उसके नाम का उल्लेख पढनें में आता है। हिटलर के नाझी सैन्य के मुख्यालय को 'वुल्फशँग' (Wolfcgang) कहाँ जाता था, किंतु उससे चारसौ साल पुर्व नॉस्त्रादेमसने जर्मन सैन्य को 'भेडियाँ' (Wolf) नाम से संबोधित किया है। अभी हम हिटलर के संदर्भ में लिखी गई चतुष्पदी का अभ्यास करेंगे। ६ शतकी ५१ चतुष्पदी-

"People assembled to see a new spectacle, Princes and Kings amongst many bystanders,
 Pillars walls to fall: but as by a miracle 
The King saved and thirty of the ones present."

"कुछ नया विचार जानने के लिए लोग इकठ्ठा हुए है...
  राजपरिवार के लोग भी उपस्थित है...
  स्तंभ और दिवारे गिरने लगी, पर एक चमत्कार हुआ...
  वह नेता और उसके तीस सहकारी पहले ही निकल चुके थे..."

           हिटलर के शुरवाती दौर में उसके विरोधकोंने हिटलर की हत्या का षडयंत्र रचा था। हिटलर के जाहीर सभा के दौरान टाईमबम से व्यासपीठ उडा देने की उनकी योजना थी। किंतु कुछ कारणवश हिटलर सभास्थान से जल्दी निकल गया और उसके साथ व्यासपीठ पर उपस्थित लोंगों की संख्या भी 'तीस' ही थी, जो इस हादसें से बच निकले। हिटलर का सभा स्थानसे जल्दी निकल जाना, इसे जर्मन नागरिक एक संजोग मानते थे, किंतु वे यह नही जानते थे, की चारसौ साल पहले यही हादसा प्रत्यक्ष रुप में किसीनें देखा है और लिखित रुप में उसका वर्णन भी किया है।
           हिटलर जर्मनी का चेंन्सलर बनने से पहले जर्मन सैन्य में काम कर चुका था। प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटन के खिलाफ लढ चुका था। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जब जर्मनी ने ब्रिटन पर हमला किया, तब 'य प्रेस' इस जगह पर बहुत बडा रणकंदन हुआ। जिसमें बहुतसे जर्मन सैनिक मारे गए और जो सैनिक बच गए उनमें हिटलर शामिल था। यह युद्ध ब्रिटनने जर्मन सैनिकों के खिलाफ जहरीले वायू का इस्तेमाल करके जिता, जिससे हिटलर कुछ दिनों के लिए अँधा बन गया। उसी वक्त उसने प्रतिज्ञा की, "एक ना एक दिन मैं भी मेरे दुश्मनों को इसी प्रकार मारुंगाँ।" द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी ने शत्रुसैन्य और ज्यु धर्मीय समाज के खिलाफ जो जहरिले वायू का इस्तेमाल किया उसके पिछे यह पार्श्वभूमी है। नॉस्त्रादेमस हिटलर के संदर्भ में आगे लिखते है, ३ शतक की ३५ वी चतुष्पदी-

"From the very depths of the West of Europe,
A young child will be born of poor people, He who by his tongue will seduce a great troop: 
His fame will increase towards the realm of the East."

"युरोप के एक पश्चिमी देेश में...
  एक बच्चा गरीब परिवार में जन्म लेगा...
  वह अपने वक्तृत्व से सबको आकर्षित करेगा...
  उसकी सत्ता पुर्वीय देशों पर प्रस्थापित होगी..."



           इस चतुष्पदी कि पहली दो पंक्तियाँ स्पष्टरुप से 'हिटलर' कि तरफ अंगुलीनिर्देश करती है। उसके वक्तृत्व से सभी जर्मनवासियों को नवसंजीवनी मिल गई। 'व्हर्साय समझौता' के कारण जो अंगारे जर्मन समाज के दिल में सुलग रहे थे, उसे विस्तव में बदलने का काम हिटलर ने किया। हिटलर के शुरवाती दौर में वह "जर्मनी का मसीहा" बनकर जर्मन समाज के सामने आया। आज जिस तरह मध्यपुर्व देश के आतंकवादी 'जिहाद' के नारे लगाकर, किसी विशिष्ठ धर्म के लोगों को आकर्षित कर रहे है। उसी तरह हिटलर ने भी तथाकथित "आर्यधर्म" का दिखावा कर जर्मन समाज को आकर्षित किया, दुसरी तरफ ज्युधर्मीय समाज को कम-अस्सल और पापी बताकर ७० लाख ज्यु धर्मीय समाज का संहार किया। आखरी पंक्ती का अर्थ एकदम साफ है; पोलंड, ऑस्ट्रिया और झेकोस्लोव्हाकिया यह राष्ट्र जर्मनी के पुर्वीय प्रदेश में है। जिनपर जर्मनी ने स्वामित्व प्रस्थापित किया था।

भविष्यवाणीयों का प्रचारयुद्ध...


(जोसेफ गोबेल्स)
(Source : Internet)

           डॉ. जोसेफ पॉल गोबेल्स, जर्मनी के द्वितीय विश्वयुद्धकालीन प्रचारमंत्री। आज के दौर में भी गोबेल्स की प्रचारनीती बहुत प्रसिद्ध है। गोबेल्स की पत्नी एक रात नॉस्त्रादेमस के भविष्यवाणियों के आधार पर लिखी गई एक किताब पढ रही थी। उसने जिज्ञासावश नॉस्त्रादेमस का मूल ग्रंथ "सेंच्युरिज" का जर्मन भाषांतर प्राप्त कर लिया। उसमें उसने वही हिटलर के साथ घटी दुर्घटना का प्रसंग पढा। हिटलर के साथ घटी दुर्घटना और चतुष्पदी में दिया हुआ भविष्यकथन शतप्रतीशत मिल रहा था। उसने वह ग्रंथ अपने पती गोबेल्स को दिखाया। वह ग्रंथ पढने के बाद गोबेल्स सतर्क हो गया।
           उसने गेस्टापो (जर्मन गुप्तहेर) को जर्मन एवं फ्रेंच भाषा पर प्रभुत्व पाने वाले ज्योतिषी के खोज में लगाया। उन्हें स्वित्झर्लंड में 'अर्न्स्ट क्राफ्ट' नाम का ख्यातनाम ज्योतिषी मिला। गोबेल्सने उसे हिटलर का भविष्य पुछा। क्राफ्ट मन ही मन घबराया; किंतु युद्धजन्य परिस्थिती के कारण उसे पैसों की जरुरत थी। इसलिए उसने हिटलर के बारे में सबकुछ अच्छा बताया। गोबेल्स ने क्राफ्ट को 'सेंच्युरीज' ग्रंथ के आवृत्तीयों में नकली चतुष्पदी डालने का काम सौंपा। विश्वयुद्ध के उत्तरार्ध में नाझी सैन्य का होनेवाला पराभव और हिटलर का अंत बतानेवाली चतुष्पदीयाँ निकाली गई। उसकी जगह हिटलर की विजय और मित्रराष्ट्रों का पराजय बतानेवाली झुठी चतुष्पदीयाँ शामिल कर ली गई। हवाईजहाज से वह नकली ग्रंथ फ्रान्स और इंग्लंड के तटीय प्रदेशों में फेंके गए।

(विस्टन चर्चिल)
(Source : Internet)

           तत्कालीन ब्रिटीश पंतप्रधान विस्टन चर्चिल को इस बात का पता चला, तब उन्होंने फ्रान्स से नॉस्त्रादेमस का मुल "सेंच्युरीज" ग्रंथ प्राप्त कर लिया। उसका जर्मन भाषा में यथायोग्य भाषांतर करके वह आवृत्तीयाँ जर्मनी और जर्मनी ने जीते हुए राष्ट्रों में हवाईजहाज से फेंका गया। इस तरह नॉस्त्रादेमस के "सेंच्युरीज" ग्रंथ के आधारपर एक अलगही प्रचारयुद्ध खेला गया।
            हिटलर और गोबेल्स ने झुठी चतुष्पदीयाँ रची; पर जो नॉस्त्रादेमस ने देखा और लिखा वह कुछ अलगही था। गोबेल्स ने नॉस्त्रादेमस की चतुष्पदीयों को झुठा ठहराया; किंतु नॉस्त्रादेमस के शब्दों में बताया जाए तो... "नियती को कोई बदल नही सकता; ना कोई रोक सकता है।" द्वितीय विश्वयुद्ध का और एक महत्वपुर्ण अंग है, वह है अमरिका ने जपान के नागासाकी और हिरोशिमा पर फेंके हुए "एटमबम"। पुरे विश्व को अपरिचित इस विनाशकारी अस्त्र के बारे में नॉस्त्रादेमसको पुरी जानकारी थी, जी हाँ "दि सेंच्युरीज" ग्रंथ में "एटमबम" का भी उल्लेख है।


        


        

No comments:

Post a Comment

डुम्स डे किंवा अंतिम निर्णयाचा दिवस

Repost Original Date: 02 मार्च 2021            ख्रिश्चन, ज्यू आणि इस्लाम हे तिन्ही अब्राम्हीक धर्म मानले जातात आणि ह्या तिन्ही धर्मांच्या उग...