Monday, 6 April 2020

सहयोग से सत्याग्रह

                "सत्याग्रह" यह शब्द भारतीयों के लिए नया नहीं है। सत्याग्रह का सरल अर्थ है सत्य का आग्रह। भारतीय स्वतंत्रता समर में इस शब्द का बहुत महत्व है। ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध असहयोग से सत्याग्रह हुआ। पर यह सहयोग से सत्याग्रह क्या है.? हर एक के मन में प्रश्न आया ना.? आज दुनियाभर में कोविद-१९ इस बीमारी ने बड़ा हड़कंप मचा दिया है। हर एक देश इस बीमारी से जूझ रहा है। इस बीमारी पर तोड़ निकालने की कोशिश कर रहा है। भारत में भी सब प्रयास जारी है। पंतप्रधान, मुख्यमंत्री सब अपनी अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश कर रहे है। पंरतु समाज में कुछ ऐसे कीड़े-मकोड़े है जो इस प्रयास को हतप्रभ करने की कोशिश कर रहे है।
                कुछ दिन पहले दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में एक विशिष्ट वर्ग विशेष का सम्मेलन हुआ। दिल्ली में संचारबंदी होने के बावजूद ८ से ९ हजार लोग देश के विभिन्न शहरों से, इलाकों से इतनाही नहीं विदेश से भी कई लोग इस सम्मेलन में शामिल हुए। और कोविद-१९ मरीजों का जो आंकड़ा ५०० तक रुका था वो आज ३००० तक पहुँच गया है। मुझे आश्चर्य इस बात का हैं कि इन लोगों को देश की नही तो नहीं पर खुद के जान की भी परवाह नही है। ये लोग यहाँ तक ही नही रुके पर जब इनको समाज से अलग किया गया तो पुलिसकर्मियों से, डॉक्टरों से, नर्सेस से बदसलूकी की। अगर ये लोग सहयोग नही करना चाहते, देश की सुरक्षा की इन्हें कोई चिंता नही तो इस देश का नागरिक होने के नाते मैं सरकार के कहना चाहता हूँ के डंडे मार कर ही इन्ह जैसे हर एक को सीधा करे, फिर वो कोई भी हो।
                 दूरसे कीड़े-मकोड़े है जो खुद को बोहोत पढा-लिखा मानते है। खुद को पुरोगामी मानते है। आज के वक्त में पुरोगामी इस शब्द का एकही अर्थ है "मोदी विरोधी"। जो कुछ भी मोदी कहें, कुछ सोच विचार के बिना उसे विरोध करना है। मोदीजी ने डॉक्टरों, नर्सेस, पुलिसकर्मियों के सम्मान में ताली और थाली बजाने के लिए कहा, यह लोग उतर आए चेष्टा करने के लिए। मोदीजी ने ५ अप्रेल को रात को ९ बाजे ९ मिनट तक अपने अपने घरों की गैलरी, दरवाजे में दिप लगाने के लिए कहा। इसेस पूरे देश में, पूरे विश्व में संदेश जाए के कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम सब एक साथ है। पर उन पढे लिखे पुरोगामियों ने इसका भी मजाक उडाया। अगर संयुक्त राष्ट्रसंघ कहे के विश्व में पर्यावरण विषयक जागृति के लिए अर्थ अवर मनाया जाएगा तो ये पूरी पुरोगामी जमात एक घण्टे के लिए बे झिजक घर कें दीए बुझा देंगे। पर अगर मोदीजी कहेंगे नौ मिनट के लिए बिजली के दिए बुझा के टॉर्च जलाओ, दिप प्रज्वलित करो तो वो भोंदू, अवैज्ञानिक। वाह रे पुरोगामी जमात। इसके ऊपर इनकी अवस्था और भी मजेदार है। मैं विज्ञानवादी, मैं लाइट नही बुझाऊंगा पर फिरसे लाईट जलाने से पावरग्रिड खराब होती है इसपर भरोसा रखूँगा। कहाँ से लाते है ये लोग इतना दोगलापन। मैंने इन लोगों का जिक्र कीड़े-मकोड़े इस लिए किया क्योंकि यह लोग देश के आत्मविश्वास को खोखला बना रहे है। देश के सुरक्षा सें, देश के आत्मविश्वास से इन लोगों को कुछ लेना देना नहीं है। बस खुद का एजेंडा आगे घसीटना है और मोदी को नीचा दिखाना है।
               परंतु ऐसे परिस्थितियों में हमे क्या करना है.? केंद्र सरकार, राज्य सरकार जो कुछ भी सूचनाएं दे रही है उसका शत प्रतिशत पालन करना है। सरकार के साथ खड़े रहना है। उससे भी आगे जा के शासन, प्रशासन को प्रोत्साहित करना है। "सहयोग से सत्याग्रह" इसेही कहते है। यह संकल्पना मेरी नहीं है। पर जिनकी की है वे भारतीय समाज के स्वभाव से भली भाँति अवगत है। यह संकल्पना ऐसी है के संकट के समय में हमे मौजूदा सरकार के साथ खड़े रहना है। सरकार के विभिन्न मंत्रियों को पोस्ट कार्ड भेजना है। उसमें लिखना है कितनी भी कठिनाईयाँ आए हम आपके साथ है। आपके शब्द कुछ भी हो पर भावना यही होनी चाहिए हम आपके साथ है। हम सरकार को पूरी तरह से सहयोग करेंगे। २००८ में जब २६/११ का आतंकी हमला हुआ था। उस दौरान ऐसे हजारों खत भारत शासन, महाराष्ट्र शासन तक पहुँचे थे। पर अभी के मौजूदा स्थितियों में हम पोस्ट कार्ड नहीं भेज सकते, पर इस समस्या का भी एक समाधान है। सोशल मीडिया- फेसबूक, ट्विटर जैसे उपयुक्त सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हम शासन, प्रशासन के विभिन्न अंगों से जुड़ सकते है। उनका हौसला बढ़ा सकते है। उनको सुझाव दे सकते है। उपाययोजनाओं में अगर कुछ कमियाँ है, तो वहाँ पे ध्यान देने के निर्देश दे सकते है।
               देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आरोग्यमंत्री, आप जिस राज्य में निवास कर रहे है उस राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, आरोग्यमंत्री, पुलिस महासंचालक, अलग अलग आरोग्य संस्थाओं के चीफ ये सब लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते है। इन सब लोगों तक पहुंचे ने का सबसे प्रभावी पर्याय है ट्विटर । ट्विटर जैसा प्रभावशाली सोशल मीडिया प्लेटफार्म और कोइ नही है। और हाँ दोस्तो इन सब मे भारतीय सुरक्षा दलों मत भूलना। कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिये भारतीय सेनाओं ने "ऑपरेशन नमस्ते" शुरू किया है। उनके हौसलो को बुलंद करना हमारा पहला कर्तव्य है। इस लेख के अंत में कुछ शासकीय, प्रशासकीय ट्विटर हैंडल के लिंक भी दे रहा हूँ। मैं महाराष्ट्र राज्य का निवासी हूँ, तो केंद्र सरकार के साथ, महाराष्ट्र राज्य के शासन, प्रशासन के ट्विटर हैंडल दे रहा हूँ। आप जिस किसी भी राज्य में निवास करते हो वहाँ के सारे ट्विटर हैंडल्स आपको ट्विटर पर मिल जाएंगे।
               अब इसे लेकर भी आपके पास कोई पुरोगामी कीड़ा-मकोड़ा आ जाए और बोले के क्या कुछ भी कर रहे हो, इससे कुछ नहीं होनेवाला, कौन देखेगा तेरा ये ट्वीट, किसके पास इतना टाइम है, तो उसे एकही वाक्य में जवाब देना है। "तू पहले भाड़ में जा"। ऐसे कीड़े-मकोड़े सिर्फ देश को ही हानिकारक नही तो हमारे वैयक्तिक वैचारिक स्वास्थ के लिए भी हानिकारक है। अगर शासन, प्रशासन, स्वास्थ्य संस्थाओं के लोग हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा उठा रहे हैं तो उनको प्रोत्साहित करना हमारा पहला कर्त्तव्य है। वो देखे या ना देखे, हमे हमारा कर्तव्य निभाना है। और आगे जाके आपके पहचान में जो कोई आरोग्य विभाग सें, पुलिस विभाग से जुड़ा है उनको धन्यवाद देना है, उनको प्रोत्साहित करना है क्योंकि हमारे लिए वो अपनी जान खतरें में डाल रहे है। मोदिजी ने एक संदेश दिया था हम अकेले नहीं है। हाँ हम अकेले नही हैं पर इसे दोहराने कि जरूरत है। बार बार दोहराने की जरुरत है।
               देश में ये जो वैचारिक कीड़े-मकोड़े मौजुद है उनका मुझे गुस्सा नहीं आता तरस आती है, बुरा लगता है। एक कोरोना वायरस के वजह से इनका इतना बुरा हाल है तो आने वाले समय में क्या करेंगे यह लोग। शासन, प्रशासन बाहरी खतरे से लडे या इनकी वैचारिक लडाई लड़े। किसी भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का अभ्यास करनेवाले विशेषज्ञ से पूछें, हर कोई यहीं बताएगा के पूरी दुनियाँ तीसरे विश्वयुद्ध के अंतिम चरण में है। मुझे यहाँ किसी को डरना नही है पर सतर्क जरूर करना है। संकट बड़ा है, पर देश की सरकार, सेना दल, पुलिस दल, आरोग्य विभाग, प्रशासन के विभिन्न विभाग उस संकट को खत्म करने के लिए पूरी तरह से तैय्यार है। हमें सिर्फ और सिर्फ सहयोग करना है। और आज से मैं खुद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री जी को ट्विटर पे लिखूँगा के आप भी अकेले नहीं हो, हम सब आपके साथ है। आशा और बिनती करता हूँ के आप भी इसमें सक्रिय सहभाग लें।




केंद्र सरकार ट्विटर हैंडल्स:-

  1. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी
  2. प्रधानमंत्री कार्यालय
  3. गृहमंत्री अमित शहा
  4. आरोग्य एवं कुटुंब कल्याण मंत्री हर्ष वर्धन
  5. वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन
  6. विदेशमंत्री एस. जयशंकर
  7. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
  8. भारतीय सेना
  9. भारतीय वायुसेना
  10. भारतीय नौसेना


महाराष्ट्र राज्य सरकार ट्विटर हैंडल्स:- 

  1. मुख्यमंत्री कार्यालय
  2. उपमुख्यमंत्री अजित पवार
  3. गृहमंत्री अनिल देशमुख
  4. आरोग्यमंत्री राजेश टोपे
  5. महाराष्ट्र पुलिस

(यहाँ पर मैंने कुछ चुनिंदा ट्विटर हैंडल के लिंक दिए है। प्रशासन के अगल अलग विभागों के और अस्पतालों के ट्विटर हैंडल्स भी मौजूद है।)

© सुमित शिर्के, खारघर,

    (नवी मुंबई, महाराष्ट्र)

(सूचना:- कृपा करके कोई भी ब्लॉग पोस्ट को किसी और माध्यम में कॉपी पेस्ट ना करे। अगर किसीने कॉपी-पेस्ट के दौरान मूल लेख में कुछ भी बदलाव किए तो उसके लिए ब्लॉग जिम्मेदार नहीं होगा। आप ब्लॉग पोस्ट की लिंक जरूर शेअर कर सकते है। साथ ही ब्लॉग को फॉलो करें, ताकि आपको अगले पोस्ट की नोटिफिकेशन मिल सके)

No comments:

Post a Comment

डुम्स डे किंवा अंतिम निर्णयाचा दिवस

Repost Original Date: 02 मार्च 2021            ख्रिश्चन, ज्यू आणि इस्लाम हे तिन्ही अब्राम्हीक धर्म मानले जातात आणि ह्या तिन्ही धर्मांच्या उग...